निर्मला पुतुल की कविताओं में चित्रित आदिवासी स्त्री
Abstract
21 वीं सदी में महिला काव्यलेखन में आदिवासी कवयित्री निर्मला पुतुल का महत्वपुर्ण स्थान हैं । निर्मलाजीने संथाल आदिवासी स्त्रियों की पीड़ा, वेदना को अपने काव्य में अभिव्यक्त किया हैं । कवयित्री स्वयं एक आदिवासी स्त्री होने के नाते आदिवासी स्त्री की समस्याओं को उन्होने खुद भोगा हुआ था इसलिए उनका काव्य स्वानुभूति से युक्त हैं । एक आदिवासी स्त्री अनेक अभावों के बीच अपना परिवार किस प्रकार संभालती हैं और अपने पर हो रहे अन्याय व अत्याचार का डटकर विरोध कर अपने हक एवं अधिकारों को प्राप्त करने की कोशिश किस प्रकार करती हैं इसको काव्य के माध्यम सें अत्यंत सरल एवं सपाटबयानी भाषा में अभिव्यक्त किया हैं । अतः इनकी कविताएं आदिवासी स्त्री ही नहीं बल्की समग्र स्त्रियों को प्रेरणादायी साबित हो सकती है ।
Full text
58 International Journal of Advance and Applied Research www.ijaar.co.in ISSN – 2347-7075 Impact Factor – 8.141 Peer Reviewed Bi-Monthly Vol. 6 No. 40 September - October - 2025 . , . , , , , -431122. Corresponding Author – . DOI - 10.5281/zenodo.17656420 21 , : , , , , , , , , , , , 21 , , , , , , , -, - , 21 ‚ 71 1991 6.78 ‛1
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